लोग क्या कहेंगे Hindi Motivation Story

यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जो बहुत ही शमिर्ली और डरने वाली होती हैं इतनी कि वह किसी से ठीक से बात भी नहीं कर पाती।
एक छोटे से गांव में एक लड़की रहती हैं जिसका नाम प्रिया है वह एक शमिर्ली लड़की होती हैं ।इतनी की वह किसी अनजान व्यक्ति या दूर के किसी रिश्तेदार से ठीक से बात भी नहीं कर पाती हैं। प्रिया बचपन से ही कुछ करना चाहती हैं उसकी कुछ सपने होते हैं। जो वह पूरा करना चाहती है ।लेकिन क्या सपना है, वह क्या करना चाहती है ,यह उसे पता नहीं होता है लेकिन हां वह बचपन से ही बड़ी होकर कुछ ऐसा करना चाहती है जैसे गरीबों की मदद करना ,जो बच्चे स्कूल नहीं जा पाते उसे स्कूल भेजना और बहुत कुछ करना चाहती हैं। लेकिन यह सब करने के लिए वह बड़ी होकर कुछ बनना चाहती हैं क्योंकि प्रिया भी एक गरीब किसान की बेटी होती है तो उसे पता होता है कि गरीब के बच्चे किस प्रकार कि मुश्किल से गुजरकर पढ़ाई कर पाते है लेकिन प्रिया के पास इतने साधन नही होते हैं कि वह अपनी पढ़ाई कर सकती है वह पढ़ लिखकर कुछ ऐसा बनना चाहती हैं जो वे अपने बचपन में से सपने देखी है उसे पूरा कर सके। लेकिन उसे क्या करना चाहिए । कैसे पढ़ाई करनी चाहिए । ये प्रिया को नहीं पता होता है और वे किसी से पूछ भी नहीं सकती । कि उसे यह सब पूरा करने के लिए क्या करना चाहिए क्योंकि वह बहुत ही शर्मीली होती है और उसे डर लगता है कि लोग उसका मजाक ना उड़ा दे ,उसे कोई या ना कहे कि तुम्हारा सपना कभी पूरा नहीं होगा ,तुम अपनी औकात से ज्यादा सपना देख रही हो ।यह सब सोच कर प्रिया कभी भी किसी से भी कुछ नहीं पूछती है। प्रिया जब बचपन में होती है तो वह स्कूल जाती है तो वह दूसरे बच्चों को देखकर बहुत डरती है। जब कोई बच्चे कुछ बोल देते तो वह अपनी डर के कारण कुछ नहीं बोल पाती। लेकिन प्रिया पढ़ाई में बहुत होशियार होती है उसे पढ़ाई करना बहुत पसंद है । जब वह घर में होती है तो वह अपनी मम्मी पापा से भी बहुत कम बात करती है वह तो फोन में भी किसी से बात नहीं करती। वह सोचती है कि वह कभी भी किसी से भी फोन पर बात नहीं करेगी और प्रिया को कहीं भी आना जाना जैसे पार्टी ,घूमने के लिए गार्डन आदि पसंद नहीं होता है । यहां तक कि वे अपने बचपन में खेल कूद बहुत कम खेलती है एक बात और है वह कभी किसी बस में सफर नहीं करना चाहती । क्योंकि बस में बहुत लोग होते हैं उसे डर लगता है कि कोई उसका मजाक नहीं उड़ा दे प्रिया को पढ़ाई करना बहुत पसंद है वह ज्यादातर अपना समय अपनी पुस्तक और किताबों में देती है इसी कारण से पुस्तक और किताब ही उसकी दोस्त हैं । क्योंकि वह अपने स्कूल में ज्यादातर किसी बच्चे से बात नहीं करती है और जब उसे कुछ पूछना होता है तो वह सिर्फ उसी काम के लिए ही बात करती है जो उसे जरूरत होती है यहां तक कि उसकी टीचर भी बोलती हैं कि तुम अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हो लेकिन तुम किसी से भी कुछ नहीं बोलती हो इतनी क्यों डरती है तब प्रिया सोचतीहै कि मैं आगे जाकर अपनी इस डर को सुधार लूंगी। प्रिया पढ़ाई करने में बहुत तेज होती है वह अपनी कक्षा में हमेशा टॉप करती है उसका सबसे अच्छा दोस्त पुस्तक होता है उसके पापा भी प्रिया से बोलते हैं कि बेटा इतना डर किस बात का। तुम अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हो तो तुम्हें लोगों से बात करनी आनी चाहिए तुम्हें बाहर जाकर इस दुनिया को देखनी चाहिए ताकि जब तुम कहीं बाहर जाओ तो आसानी से जा सको। लेकिन प्रिया पापा के सामने हां बोल देती है वह कोशिश भी करती है लोगों से बात करने की। लेकिन वह कर नहीं पाते। पिया ने कई बार कोशिश भी की लेकिन कुछ लोगों ने उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया । फिर सोचती है आगे जाकर कोशिश करती हूं अपने डर को हटाने की। प्रिया अपने हाई स्कूल कि पढ़ाई अपने गांव में ही पूरा करती है
और उसे अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहर जाना होता है जो एक छोटा सा शहर होता है तो उसके सामने समस्या आ जाते हैं क्योंकि वह किसी शहर में नहीं जाना चाहती लेकिन वह पढ़ाई करना चाहती है अपने सपनों को पूरा करना चाहती है तो प्रिया को शहर जाना ही है वह शहर में अपनी पढ़ाई करने चली जाती है और वहां जाकर अपनी जिंदगी में कुछ बदलाव लाती है क्योंकि उसे पता होता है कि दुनिया को बदलने से पहले अपने आप को बदलना पडता है। मुझे आगे बढ़ना है अपने सपनों को पूरा करना है तो मुझे लोगों से बात करनी आनी चाहिए लोगों को अपनी बात समझाने आनी चाहिए । यह सब सोच कर प्रिया अपनी जिंदगी में कुछ बदलाव लाती है लेकिन वह अपने आपको उतना नहीं बदल पाती है कि वह अपनी बात दूसरों को बता सके । इसी कारण से वह हमेशा अकेली रहना पसंद करती है वह अकेली ही स्कूल जाती है और अकेले ही घर आती है उसके साथ जो बच्चे पढ़ाई करते है वे प्रिया से बात करना चाहते है लेकिन प्रिया उन बच्चो से बात नहीं कर पाती । बच्चे प्रिया से बोलते हैं तुम कुछ क्यों नहीं बोलती। किसी से क्यों बात नहीं करती। यह सब सुन कर प्रिया कुछ बात अपने दोस्तो से कर पाती है अब उसकी जिंदगी में कुछ बदलाव आ चुका होता है वह अब कुछ बात अपने दोस्तों से और अपने परिवार वालों से कर पाती है इस प्रकार प्रिया अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरा करती है अब बारी है कॉलेज की। जो उसने एक बड़ी से शहर में जाकर करनी होती है। उसके लिए यह एक चुनौती जैसी होती है। वह कभी भी शहर में नहीं जाना चाहती हैं लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए उसे जाना ही होता है एक दिन प्रिया के पापा प्रिय को बुलाकर बोलते है बेटी तुम कभी भी अकेली घर से बाहर नहीं गई हो, किसी से भी ठीक से बात भी नहीं करती हो, अब तुम अकेली शहर में रहोगी । बस में बैठकर कॉलेज जाओगी। तो तुम यह सब कैसे कर सकोगी ।प्रिया बोलती है पापा मैं अपना सपना पूरा करना चाहती हूं जो मैंने अपने बचपन में देखी है उस सपना को पूरा करने के लिए मैं सब कुछ करूंगी मैं अकेली रह लूंगी ,मैं अकेली शहर में चलना सीख लूंगी, लोगों से बात करना भी सीख लूंगी, मुझे अपने सपनों को पूरा करना है । तब पापा बोलते हैं प्रिया तुम इतनी क्यों डरती हो इतना ज्यादा क्यों शर्म आती है तो प्रिया बोलती है पापा मुझे डर लगता है कि लोग मेरी मजाक ना उड़ा दे ,लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे कि इसे ठीक से बात भी नहीं करनी आती और चली है दुनिया को बदलने। मैं क्या करूं पापा मैं यह सब भूल नहीं पा रही हूं। मैं अपने आप को बदलने की बहुत कोशिश की। लेकिन बदल ना सकी। तब पापा बोलते है तुम लोगों के बारे में क्यों सोचते हो कि वह तुम्हारे बारे में क्या सोचते हैं तुम्हें क्यों फर्क पड़ती है कि लोग क्या सोचते हैं बेटा ये वही लोग हैं जो अभी तुम्हारा मजाक उड़ा रहे हैं और जब तुम कामयाब होकर अपने सपने को पूरा करके आएगी तो यही लोग तुम्हारी कामयाबी से जलेंगे ।
पापा बोलते हैं कि बेटी मेरी एक बात हमेशा याद रखना यह जिंदगी तुम्हारी है और तुम्हारा पूरा हक है कि तुम अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जी सकती हो लोग क्या कहेंगे । तुम्हारे बारे में क्या सोचते हैं ये मत सोचो । बस अपने सपने के बारे में सोचो और उसे पूरा करो । देखना जो लोग अभी तुम्हारा मजाक उड़ा रहे हैं वह एक दिन तुम्हारे कामयाबी के आगे झुकेंगे। बस अपने सपने पर ध्यान दो । लोगों की बातों पर नहीं । प्रिया के मन में पापा का हर एक बात बैठ जाता है और वह अपने आगे की पढ़ाई करने के लिए शहर चले जाती हैं । प्रिय शहर में अकेली होती है । तो उसे कुछ दिनों के लिए मुश्किली लगता है । क्योंकि वह शहर में अकेली होती है और कभी भी घर से बाहर आकेली नहीं निकलती थी । वह अपने आप में कुछ बदलाव लाती है वह कॉलेज में सभी बच्चों से बात करती हैं और सभी को अपना दोस्त बनाती हैं । और वह एक डायरी भी लिखना शुरु कर देती है क्योंकि वह अपने हर दिन की बात को अपनी डायरी में लिखती और जो गलती होती उसे अगले दिन सुधारने की कोशिश करती । और हां प्रिया अब फोन पर भी अपनी परिवार वालों से बात करना शुरू कर दी है । अपने दोस्तों से फोन पर बात करती हैं । अब वह बदल चुकी है अब वह किसी से भी अपनी बात कर सकती है वह कहीं भी अकेली आ जा सकती है अब प्रिया किसी से भी नहीं डरती है वह किसी से भी बिना डरे बात कर सकती है और वह अपने सपनों को पूरा करना चाहती है ।

इस कहानी के अंत में मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि यदि अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हो तो दूसरों को सुधारने से पहले अपने आप को सुधारना चाहिए। कहते हैं ना कि जिंदगी में कुछ करना है जो कुछ खोना भी पड़ता है। और ये मत सोचो कि मैं क्यों बदलूं मुझे नहीं बदलना है बल्कि ये सोचो कि बदलने से किसका फायदा है तुम्हारा या लोगों का । लोगों का क्या है वे तो सिर्फ बोलते ही रहते हैं अगर तुम घर में बैठे रहोगे तो बोलेंगे कुछ नहीं करता और अगर कुछ काम करोगे तो बोलेंगे कभी भी बैठकर नहीं रहता दिन रात काम करता रहता है।

जमाना क्या सोचेंगे ये मत सोचो क्योंकि जमाना बहुत अजीब है नाकामयाब लोगों का मजाक उड़ाता है और कामयाब लोगों से जलाता है।

Life में अगर कामयाबी चाहते हो तो focus अपने काम पर करो लोगों की बातो पर नहीं।

अपने लिए नहीं तो ना सही लेकिन तुम्हें उन लोगो के लिए कामयाब जरूर बनना है जो तुम्हे नाकामयाब होते हुए देखना चाहते हैं।।

WRITER- SARITA

 

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