पिता ओर बेटी के सपने Hindi story

यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जो एक छोटे से गांव में रहती है जिसकी जिंदगी में गरीबी या पैसों के नाम पर बहुत मुश्किल आती है फिर भी वह किसी भी तरह से अपना सपना पूरा करना चाहती हैं क्योंकि वह सोचती है यदि मैं यह सोचा सकती हूं तो यह कर भी सकती हूं जब यह बात मेरे दिमाग में आ सकती है तो इसे मै अवश्य पूरा करूंगी उसने अपनी जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानी।
एक गांव में एक किसान रहता है जिसकी चार बेटी और एक बेटा होता है वह बहुत गरीब होता है और वह पढ़ा लिखा नहीं होता है उसकी पत्नी उसके साथ खेती करती हैं वे दोनों पढ़े -लिखे नहीं होते फिर भी अपने बच्चों को पढ़ाना लिखाना चाहते हैं उस किसान को लगता है कि उसने जो बचपन में पढ़ाई नहीं की और उसे अब खेती काम करना पड़ा रहा है वे मेरे बच्चों को ना करना पड़े वह अपने बच्चों को कुछ बनाना चाहता है ताकि उसे खेत में काम ना करना पड़े उसकी तीन बेटियों को तो पढ़ाई में कोई लगाव नहीं होता और बेटा वे अभी छोटा है लेकिन उसकी एक बेटी होती है जिसका नाम सुनीता है उसे बचपन से ही पढ़ाई करना बहुत पसंद है जब वह 7 साल की होती है तो उसने अपनी प्रारंभिक क्लास की पढ़ाई सअपने गांव से ही की लेकिन कुछ कारण से उसे अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए अपने मामा के यहां जाना पड़ा उसने अपनी आगे की पढ़ाई चौथी क्लास अपनी मामा गांव में शुरू की।सुनीता जब पांचवी क्लास में थे तो उसे हिंदी विषय में 100 में 95 अंक प्राप्त हुए तो उसके शिक्षक ने उसे बुलाकर पूरे क्लास के सामने बधाई दी तब उसने सोचा कि मैं हिंदी विषय में इतना अच्छा अंक ला सकती हूं तो बाकी विषय में क्यों नहीं ला सकती जब उसे समझ में आ गई कि उसने हिंदी विषय के अलावा बाकी अन्य विषय में पढ़ाई नहीं की है ।
सुनीता बहुत मेहनत करती है वहा एक गरीब की बेटी है तो उसे अपने पढ़ाई के आलाव खेती का भी काम करना पढ़ता है । वहा दिन में स्कूल जाती है जब स्कूल से आती तो खेत पर काम करने चले जाते है । और अपना होमर्क रात में करती हैं,सुनीता को अपनी पढ़ाई करने के लिए बाहर से कुछ पुस्तक ले आती हैं वे तो गणित विषय में कमजोर है तो सुनीता जो homework क्लास में दिए होते हैं उसे पुस्तक से देखकर देखती हैं एक दिन उसके मामा ने यह करते हुए देखा लेता है और बोलता है कि गणित विषय देख कर लिखने के लिए नहीं होता इसे समझना पड़ता है उस दिन से सुनीता की जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया और वह कभी भी गणित को किसी कापी से या पुस्तक से देखकर नहीं लिखी । वह हमेशा गणित को समझती और हल करने का कोशिश करती हैं । उसे उस दिन से गणित विषय बहुत पसंद आने लगा। वह कैसे भी करके अपनी नवी कक्षा पूरी करती है ।जब वह 9वी कक्षा में होती हैं तो उसकी बड़ी दीदी की शादी होने वाली होती है तो उसके परिवार वालों के लोगों ने सुनीता के पापा से कहा कि सुनीता की भी शादी कर दो आज कल जमाने का कोई विश्वास नहीं होता है लेकिन सुनीता पढ़ना चाहती हैं।वह अपने पापा का सपना पूरा करना चाहती हैंउसने कैसे भी करके अपने पापा को मनाने की कोशिश करती हैं और आखिर पापा मान जाते है।क्योंकि सुनीता के पापा को अपनी बेटी पर पूरा विश्वास होता है।वह चाहता है। किउसकी बेटी पढ़ लिख कर अपना सपना और मेरा सपना पूरा करें। सुनीता ने अपनी दसवीं कक्षा में पूरे गांव में टॉप करती है जिससे उसकी मम्मी पापा बहुत खुश होते है ।सुनीता किसी भी तरह से अपनी हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी करती हैं अब बारी है कॉलेज करने के लिए शहर जाने की। तो उसके सामने एक फिर समस्या आ जाती है और वे है सुनीता को शहर जाना उसके परिवार वालों का बोलना है कि लड़की को शहर में अकेले ना भेजें क्योंकि लड़की को अकेले पढ़ने के लिए शहर नहीं भेजना चाहिए इसमें उसे कोई ज्यादा पेरशानी नहीं होती है क्योंकि सुनीता के पापा उसके साथ होते है सुनीता के पापा जानते हैं की उसकी बेटी ऐसा कोई काम नहीं करेगी। जिससे उसे शर्मिंदा होना पड़े पापा मान जाते हैं सुनीता को शहर भेजने के लिए। फिर बात एडमिशन फीस की होती है ।उस समय उसके पापा के पास इतने पैसे नहीं होते की वह सुनीता की एडमिशन किसी कॉलेज में कर सके । फिर सुनीता के पापा ने कैसे भी करके किसी पड़ोसी से कुछ पैसे उधारी मांगा कर लाते है फिर सुनीता का एडमिशन इंजीनियर कॉलेज में हो जाता है और सुनीता अपने किसी रिश्तेदार के यह रहने लगती है सुनीता के जिंदगी में बहुत मुश्किल आया लेकीन वह कभी भी हार नहीं मानी । फिर भी उसके आत्मविश्वास को कोई तोड नहीं पाया इस तरह वह अपनी पढ़ाई कर रही हैं उसके जिंदगी में इतने मुश्किल आने के बाद भी वह कभी भी यह नहीं सोचा की वह पढ़ाई छोड़ दे। वह अपना सपना पूरा करना चाहती है।

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है की यदि हमारे मन में कुछ करना चाहते है तो वह हम कर सकते हैं चाहे हमारे जिंदगी में कितनी भी तकलीफ क्यों ना आए यदि हम पूरी मेहनत से ,पूरी लगन से वह काम करते हैं तो वह एक दिन मिल ही जाता है।

कहते है ना कि यदि विश्वास खुद पर हो तो खुदा वहीं देते है जो किस्मत में होता हैं, लेकिन विश्वास खुद पर हो तो खुद वह ही लिखते है जो तुम चाहते हो ,

खुदा उसी की मदद करता है जो खुद की मदद करता है

WRITER  – SARITA

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