एक छोटे बच्चे का पहचान Hindi Story

यह एक लड़के की कहानी है जो बहुत मेहनती और साहसी भी है उसकी जिंदगी में बहुत सी कठिनाई ,तकलीफ आई फिर भी वह कभी भी हार नहीं माना।
एक गांव में एक लड़का रहता हैं। उसका नाम सागर है वह एक गरीब मजदूर का बेटा है उसके पापा एक आलसी और कामचोर व्यक्ति हैं वह कुछ नहीं करता बस घर में बैठे-बैठे खाता है ।उसकी मां एक सुशील स्त्री हैं।वह घर का कामकाज करके खेतों में मजदूरी करने जाती हैंऔर वह मजदूरी करके अपने घर का पालन पोषण करती हैं। सागर को बचपन से ही पढ़ाई करने का बहुत मन है वह चाहता हैकि वह भी दूसरे बच्चों के जैसे स्कूल जाए और पढ़ाई करें परंतु वह गरीब मजदूर का लड़का होने की वजह से स्कूल नहीं जा पाता है ।एक दिन सागर मां से बोलता है मां मुझे भी स्कूल जाना है मैं भी पढ़ाई करना चाहता हूं यह बात सुनकर मां ने सागर से कहा बेटा हम गरीब मजदूर है हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं तुम्हें पढ़ा सकूं तुम्हारे पापा तो कुछ काम नहीं करते हैं और मैं जो खेतों में मजदूरी करती हूं उससे केवल घर का ही गुजारा होता है यह कह कर वह दोनों खेतों में काम करने चले जाते हैं। लेकिन उस दिन सागर के मन में स्कूल जाने की बात बैठ गई।
रात में ठीक से सो भी नहीं पाया वह बस स्कूल जाने की बात ही सोचता रहता है फिर जब सुबह होता है तो उसके गांव में एक प्रतियोगिता होती है जिसमें बच्चों को कविता ,कहानी चुटकुला आदि सुनना होता है उस प्रतियोगिता में कुछ इनाम भी होते हैं सागर भी इस प्रतियोगिता में भाग लेता है और एक कविता सुनाता है जो बहुत ही अच्छा होता है और सभी लोगों को बहुत ही पसंद आता है। और वह यह प्रतियोगिता जीत जाता है इस प्रतियोगिता में एक व्यक्ति ने कहा कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती उसने इस विषय में एक कविता कहीं जिसमें बताया गया की यदि हम कोशिश करें तो वह सब कुछ कर सकते हैं जो हम सोचते हैं यह बात सागर की मन में बैठ गए और वह यह सोचते सोचते अपने घर चला गया और मां को इनाम दिखाया मां बहुत खुश हुई। सागर हो रात में नींद नहीं आया। वह उस कविता के बारे में सोच रहा होता है जो प्रतियोगिता में एक व्यक्ति ने सुनाया था वह रात में सोचता रहता है और जब सुबह होता है तब अपनी मां से बोलता है मां मैं आज स्कूल जाऊंगा और पढ़ाई करूंगा मां कहती है बेटा मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं तुझे पढ़ा सकूं तो सागर बोलता है मां मैं सुबह स्कूल जाऊंगा। स्कूल से आने के बाद मैं खेतों में काम करने चला जाया करूंगा ।सागर के जिद करने के बाद मां मान जाती हैं सागर सुबह न्यूज़पेपर घर-घर पहुंचाता है फिर स्कूल जाता है और स्कूल से आने के बाद खेतों में मां के साथ काम करने जाते हैं और रात में वह अपना पढ़ाई करता हैं यह हर दिन का काम होता है सागर अपनी पढ़ाई में पूरा मन लगाकर करता है और अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करता है उसके पापा जो एक आलसी व्यक्ति है और कुछ भी काम नहीं करता है वह सागर से जलने लगता है कि उसे न पढ़ाएं। वह खेतो में काम करने जाए। अपनी मां के साथ काम करे।और मुझे कुछ काम ना करना पड़े क्योंकि जब सागर स्कूल जाने लग हैं तो उसकी मां सागर के पापा को बोलते है घर में बैठे-बैठे खाने से कुछ नहीं होता कुछ काम करो । यह झगड़ा हर रोज होने लगता है जब सागर के पापा उसकी मां से पैसे मागाते हैं। तो नहीं देते हैं और बोलती हैं मै खेतो मै मजदूरी करके घर चला रही हूं और तुम घर में बैठे रहते हो । कुछ काम नहीं करते। मैं पैसे कमा कर लाती हूं और तुम बैठे-बैठे उसे खर्च कर देते हो। सागर के पापा बोलते हैं तुम मुझे पैसे नहीं देते और इस सागर को पढ़ने के लिए स्कूल भेजती हो ।इसे पढ़ा लिखा कर क्या कर लोगे ।कौन से यह कलेक्टर बन जाए अब यह बात हर रोज होने लगी हर दिन सागर के पापा सागर की मां को सागर की पढ़ाई के बारे में झगड़ा करता जिसकी वजह से सागर बहुत कम स्कूल जाने लगता है और पूरे दिन अपनी मां के साथ खेत में काम करता है और रात में अपना पढ़ाई करता है।तब से सागर के मन में यह बैठ जाता है कि उसे कलेक्टर बनना है अपने पापा को दिखाना है कि वह यह कर सकता है वह रात रात भर जागा कर अपना पढ़ाई करना शुरू करता है सुबह न्यूज़ पेपर घर घर पहुंचता है फिर स्कूल जाता है और आने के बाद मां के साथ खेती में काम करने जाता हैं ।
किसी भी तरह से सागर अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरा करता है अब बारी थी कॉलेज जाने की जो उसे शहर में जाकर करना है तब सागर के पापा फिर कहते हैं इसे शहर मत भेजो हम इतनी गरीब है इसे शहर भेजोगे तो इतने सारे पैसे कहां से आएगा लेकिन सागर पढ़ना चाहता है उसने अपनी मां को मनाली। मां के पास कुछ पैसे हैं जो सागर को दे देते हैं। अब सागर अपनी कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए शहर जाता है। और वह अपनी पढ़ाई पूरा करता है उसने अपना कॉलेज का पढ़ाई ठीक से करता है और साथ ही अपने कलेक्टर की पढ़ाई भी करता है जब उसका एग्जाम होता है तो वह रास्ते से होकर जा रहा होता है तो वह एक कार से टकरा जाता है और उसके सिर पर चोट लग जाता है और उसके सिर से बहुत खून बहने लगते हैं फिर वह सोचता है कि मैं एग्जाम दिलाने जाऊं या अस्पताल फिर सोचता हैं कि मैंने इतने तकलीफ से यहां तक पहुंचा है मुझे अपने पापा को दिखाना है मेरी मां जो मेरी राह देख रही है उसके सपने को पूरा करना है यह सोच कर एग्जाम दिलाने चले जाता है सागर एग्जाम दिलाता है फिर अस्पताल जाता है कुछ महीनों में सागर का रिजल्ट जाता है वह एक कलेक्टर बन जाता है उसने वह कर दिखाता है जो उसने बचपन में सोचा था जो उसने पापा को कलेक्टर बनने की बात कहा था वह उसने पूरा कर लिया है। जब वह अपनी मां के पास गांव पहुंचा तो मां सागर को देख कर बहुत खुश होता हैं और पापा भी बहुत खुश हुआ और अपने आप को शर्मिंदा महसूस करने लगते हैं। उसने सागर से कहा बेटा मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हें भला बुरा कहा । मै तुम्हारे पढ़ाई को छोड़ना चाहता था।मुझे माफ़ कर दो। इस प्रकार सागर अपने मां पापा के साथ खुशहाल की जिंदगी बिताने लगे।

कहते हैं ना कि
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती ,कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
इस कहानी में हमे यही सीख मिलती है कि जिन्दगी में कितने भी तकलीफ क्यों ना आ जाए फिर भी एक बार कोशिश करनी चाहिए।
कभी हार मत मानो अगर Thomas Alva Edison 9,999 बार नाकामयाब होने के बाद हार मान लेते तो आज बल्ब नहीं होता।
उड़ान तो भरनी है चाहे कई बार गिर ना पड़े सपने को पूरा करना है चाहे खुदा से भी लड़ना पड़े।

जमाना क्या सोचेंगे यह मत सोचो क्योंकि जमाना बहुत अजीब है नाकामयाब लोगों का मजाक उड़ाता है और कामयाब लोगों से जलता है।
लोगों के बारे में क्यों सोचते हैं की वह तुम्हारे बारे में क्या सोच रहे हैं जिंदगी तुम्हारी है तुम जानो तुम्हें कैसे जीना है।

WRITER  – SARITA

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